मैं राजनीतिविज्ञान का छात्र हूँ.रांची यूनिवर्सिटी से पीजी कर रहा हूँ.आज सबसे अधिक शोषण छात्रों का हो रहा हैं.राजधानी में भले ही कोचिंग संसथान निजी कॉलेज खुल गए है लेकिन वहां एक्का दुक्का को छोड़कर बाकि जगह गुणवत्ता की कोई जगह ही नही है.जबसे झारखण्ड अलग हुवा यहाँ के युवा को काफी उम्मीद थी.लेकी क्या वे उमीदें पुरी हुईं!बिलिकू भी नही......................अभी तक झारखण्ड लोक सेवा आयोग ने मात्र दो सिविल सेवा की ही अनुसंसा की हैं.आज महामहिम ने ४ लोगो को नया मेंबर बनाया हैं.कुछ उम्मीद की हलकी सी किरण दिखायी पड़ती है.लेकिन सबे दुःख की बात ये है की छात्रों के नम पर राजीनीति करने वाले दर्जन भर संगठन राजधानी में हैं,लेकिन सभी का अपनी डफली अपना राग है.छात्रों के नम पर राजनीती करने वाले ये कथित छात्र संगठन आज तक छात्रों की प्रॉब्लम को हल करने के लिए क्या किए.ये जवाब उनको छात्रों को देना होगा। झारखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा हुयी बहाली में अनियमितता की खबरे कितनी बार विभिन्न अखबारों में छपी लेकिन कोई भी छात्र संगठन ने आवाज उठाने की जहमत नहीउठाई क्यों!मई बताता हु.क्यूंकि अखिल बिद्यार्थी परिषद् के संगठन से जुड़े १० लोगो का हवा.आजसू के प्रेजिडेंट का भाई का चयन हुवा...बाकि बाद में लिखूंगा.................................
जब मै कल यह ब्लॉग लिख रहा था सायद उसी समय झारखण्ड लोक सेवा आयोग के अध्याचऔर मेंबर गोपाल सिंह,राध्गोविंद नागेस पर प्रेजिडेंट महोदय के पास हटाने करने के लिए निर्णय लिए जा रहे थे.मै ब्लॉग लिखने के बाद घर पंहुचा शाम को दैनिक जागरण के युवा पत्रकार महोदय नीरज अम्बस्त्ठ ने फ़ोन करके पुचा की रवि जी कुछ समाचार मालू है! मैंने बोला भइया नही.तो उन्होंने कहा की आपलोग जिस अभियान में लगे हुवे थे,उसमे राज्यपाल ने दिलीप प्रसाद,गोपाल सिंह,को बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी है,इतना बोलने के बाद फ़ोन काट दिया.सुरु में तो मुझे बिस्वास नही हुवा.लेकिन ये एक पत्रकार की सुचना थी.ओ भी दैनिक जागरण के बयूरो के पत्रकार की.जरुर ये कदम महामहिम की टीम ने उठाया लेकिन मसले वहीँ है.जिन लोगो की नियुक्ति ग़लत तरीके से की गयी हैं उनका क्या होगा!क्या उनकी नियुक्ति रद होगी!चुकी यही आरोप लगा कर इनपर बर्खास्त करने कासिफारिश की है.!ऐसे में सिर्फ़ महमहिम का निर्णय हठी के दंत दिखने के कुछ और खानके कुछ और वाली कहावत को चरिताहार्थ कर रही है.जो भी नियिक्तिया हवी है.सभी इन्ही महामहिम के समय में हवी है.महमहिम भी उतनी ही जिम्मेवार है.क्यूंकि महामहिम ने पला बदलते हुवे अब सिर्फ़ जाँच की अनुसंसा रास्त्रपति को करेंगे.क्या है जनता को बरगलाने की साजिश!!!!!!!!!!!
बुधवार, 25 फ़रवरी 2009
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
रवि जी मैं आपकी बातों से पूर्णतः सहमत हूं। मुझे लगता है कि रांची में राजनीति को लोगों ने दुकानदारी का पर्याय बना लिया है। पहले पहल जो नेता हुआ करते थे, उनके पास जाने से छात्रों को कुछ मदद मिलती थी, अब नेतानुमा नमूनों के पास शोषण है, लूट है, आदि-अनादि यत्रे.. यही कथा है। खैर, आपकी सार्थक पहल के लिए आपकी सफलता की अग्रिम कामनाओं के साथ बधाई...
जवाब देंहटाएंRavi ranjan jee... great start...keep it up
जवाब देंहटाएंAccha pryas hai. Niyamitata banaye rakhein.
जवाब देंहटाएं